सुप्रीम और हाई कोर्ट से मेरा निवेदन और आग्रह है विवाह पर जो आप लोगों ने कोर्ट मैरिज का ऑप्शन निकाला है।। माता-पीता के लिए कष्ट का कारण बन रहा है क्या इस देश में माता-पिता का सिर्फ इतना ही जिम्मेदारी है कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई लिखाई सेवा के सिवा और कोई अधिकार नहीं है बच्चों के ऊपर यह अधिकार भी उनका है कि वह किससे शादी करेंगे कहां करेंगे इस अधिकार से आप वंचित नहीं कर सकते हो।। जन्म देने वाला ही उनका सब कुछ है।। शादी विवाह में माता पिता का अनुमति लिखित और प्रत्यक्ष रूप से मौजूदगी होनी चाहिए दोनों पक्षों में।।
यह देखने को अक्सर मिल रहा है भाग- भाग कर लोग शादी कर ले रहे हैं माता-पिता रो रहे हैं और उल्टा पर पुलिस प्रशासन से सुरक्षा मांग वीडियो बना कर रहे हैं उन बच्चों यह कौन सी स्वतंत्रता आप दे रहे हैं बच्चों को और समाज और माता-पिता को दोनों को कष्ट में डाल रहे हैं।।
माता-पिता का पूर्ण अधिकार है अपने बच्चों पर और इस अधिकार से आप वंचित नहीं कर सकते है कोई भी कानून वंचित नहीं कर सकता है।। उन माता-पिता पर क्या गुजरती है - सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को यह मालूम होना चाहिए आजादी का यह मतलब नहीं है क्यों भाग-भाग कर बिना बताए शादी कर ले।। आप लोग कोर्ट मैरिज और नोटरी से सर्टिफिकेट दे देते हो।। बिना माता-पिता की अनुमति से..।
भारत की अपनी एक संस्कृति संस्कार सभ्यता है।।
उसके अनुकूल कार्य हो तो ठीक रहेगा।।
लेखक आदर्श पाण्डेय ©®
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